तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के आरोपों का नीति आयोग ने दिया जवाब, बताया राज्य को कब कितना पैसा दिया गया

 तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के आरोपों का नीति आयोग ने दिया जवाब, बताया राज्य को कब कितना पैसा दिया गया

नीति आयोग ने रविवार को होने वाली बैठक से पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है। नीति आयोग ने कहा है कि राज्य के साथ मिलकर काम करने के लिए पहले से ही कई कदम उठाए जा चुके हैं। पिछले साल मुख्यमंत्री के साथ 30 से अधिक बैठकें हुईं। प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल हैदराबाद में मुख्यमंत्री राव से मुलाकात भी की थी। हाल ही में, एक बैठक किए जाने के अनुरोध का मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
नीति आयोग ने आगे कहा है कि पिछले चार साल में भारत सरकार ने तेलंगाना राज्य के लिए जल जीवन मिशन के तहत 3982 करोड़ रुपए आवंटित किए लेकिन, राज्य की ओर से केवल 200 करोड़ रुपए ही निकाला गया। इसके अलावा, 2014-2015 से 2021-2022 के दौरान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम-कमान क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत तेलंगाना को 1195 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
नीति आयोग ने राव के फैसले को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
आयोग ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। गवर्निंग काउंसिल एक ऐसा मंच है जहां टॉप राजनीतिक नेतृत्व विकास संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है और देश के विकास के लिए उचित समाधान पर सहमत होता है।
राव ने राज्यों के प्रति भेदभाव का आरोप लगाया
दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि राज्यों के प्रति केंद्र के भेदभावपूर्ण रुख के खिलाफ वह सात अगस्त को होने वाली नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की सातवीं बैठक का बहिष्कार करेंगे। पीएम मोदी को कड़े शब्दों में लिखे अपने पत्र में राव ने कहा कि भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में तभी विकसित हो सकता है, जब राज्य विकसित हों। उन्होंने कहा कि मजबूत और आर्थिक रूप से जीवंत राज्य ही भारत को एक मजबूत देश बना सकते हैं।
बैठक मुझे उपयोगी नहीं लगती
राव ने पत्र में बैठक का बहिष्कार करने के कई कारण बताते हुए कहा, इन तथ्यों को देखते हुए, मुझे सात अगस्त, 2022 को होने वाली नीति आयोग की सातवीं बैठक में भाग लेना उपयोगी नहीं लगता। मैं भारत को एक मजबूत और विकसित देश बनाने के हमारे सामूहिक प्रयास में राज्यों के साथ भेदभाव करने और उन्हें समान भागीदार के रूप में नहीं मानने के केंद्र सरकार के वर्तमान रुख के खिलाफ इस बैठक से दूर रहूंगा।

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