दो दिवसीय पूर्वांचल लोकोत्सव एवं कार्यशाला संपन्न

 दो दिवसीय पूर्वांचल लोकोत्सव एवं कार्यशाला संपन्न

लखनऊ। श्याम कवि लोक कल्याण संस्थान द्वारा भारतीय लोक संस्कृति पर आधारित दो दिवसीय पूर्वांचल लोकोत्सव एवं कार्यशाला का आयोजन मोहन सिंह बिष्ट सभागार उत्तराखण्ड महापरिषद भवन कुर्मांचल नगर लखनऊ में किया गया।
दो दिवसीय पूर्वांचल लोकोत्सव एवं कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि उ0प्र0 इण्डियन रेडक्रास सोसायटी के महासचिव डॉ0 हिमाबिन्दु नायक, विशिष्ट अतिथि नेहरू युवा संगठन के अपर निदेशक शफीक जंमा, राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य सलाहकार सतीश त्रिपाठी, चन्द्र किशोर शर्मा, इण्डियन बैंक के वरिष्ठ प्रबन्धक सुमित सिंह एवं इण्डियन बैंक की प्रबन्धक श्रीमती प्रतिभा सिंह के कर कमलों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस पूर्वांचल लोकोत्सव के अवसर पर संस्था के सचिव नित्यानन्द शर्मा ने अतिथियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह तथा पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक सुरेन्द्र राजेश्वरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि लोकगीत एवं लोकनृत्य की अपनी विशिष्ट पहचान है समृद्ध विरासत की विविधता को संजोये हुए ये आंगिक कलारूप लोक संस्कृति के प्रमुख वाहक है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल कलाकारों को प्रेरित करेगी, बल्कि इन कलाओं को आगे बढ़ाने का भी देगी। श्याम कवि लोक कल्याण संस्थान का भी प्रयास है कि हमारी विलुप्त हो रही संस्कृति और सभ्यता को बचाया जाए और उन्हें आगे बढाया जाए, इससे कलाकारों को आत्मबल मिलेगा। कार्यक्रम में सचिव नित्यानन्द शर्मा ने कहा कि श्याम कवि लोक कल्याण संस्थान, देवरिया विगत कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अवधि भोजपुरी लोकोत्सव, सांस्कृतिक कार्यशाला, सामाजिक कार्यक्रमों, साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है। उन्होंने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य अपनी संस्कृति एवं लोक कलाओं का संरक्षण सवद्र्धन तथा विकास करना है। इस दौरान उन्होंने मुख्य अतिथि एवं अतिथियों व कलाकारों का हृदय से स्वागत और आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय भोजपुरी लोकोत्सव के आयोजन में संस्थान के कलाकारों ने अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चार चॉद लगा दिये। लोकोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे सर्वप्रथम सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई। लोक गायिका हरितिमा पंत ने स्वागीत गीत की प्रस्तुति दी जिसके बोल है अभिनन्दन सौ सौ बार। भरतनाट्य की सुन्दर प्रस्तुति लवली घिल्डियाल के निर्देशन में पारम्परिक अवधी लोक नृत्य नन्ही नन्ही बूदिया रे, अवधी लोक गीत की प्रस्तुति जिसके बोल है- कैसे खेलन जाऊ सावन मा बदरिया। लोकोत्सव में डांडिया नृत्य तथा पारम्परिक होली गीतों की भी धू रही। भोजपुरी लोकगायक लाल जी मौर्या के निर्देशन में गीत प्रस्तुत किया जिसके बोल है-कन्हैया हो तोरी गजब की मुरलिया। भाजपुरी लोकगीत अवध नगर में भैईले राम के जनम्वा आदि। भोजपुरी कलाकार सूरज नारायण द्वारा व्रत पर्व के गीत जन्म संस्कार के गीत जिसमें सोहर, छट्ठी का गीत, खेलनवा आदि। धरोहर पारम्परिक भोजपुरी लोकगीत जिसके बोल है-गोर के जनमलका दुलहा काला काहे अइल हो, गोर हमार बाबा सासु गोर हमार अम्मा हो, अम्मा हमार मुसहरवा कइली काला हम होई गइली हो जैसे पारम्परिक गीतों की श्रृखलाबद्ध तरीके से सुन्दर प्रस्तुति दी गई। हरितिमा पंत ने अवधी लोकगीत राम चंद्र जन्म का सोही गीत सुनाया। इस अवसर पर गायन कलाकार के रूप में सुरेन्द्र राजेश्वरी, लालजी मौर्या, सूरज नारायण, हरितिमा पंत, नृत्य कलाकार के रूप में अंजलि बबिता, सोनी, रेश्मा, रूहानिका त्रिवेदी, ज्योति भारती, स्नेहा गौतम, संजना गौतम, प्रीति गौतम, चांदनी राव, श्रेया, वर्षा गौतम, प्रसिद्धि वर्मा, अन्नपूर्णा, कशवी गुप्ता, ख्याति, अनिका, अनुष्का श्रीवास्तव, आर्या झा, त्रशिका सिंह, आकृति श्रीवास्तव, निशु भट्ट, कामनी चौहान एवं विशाल और वाद्य कलाकार के रूप में विनोद, अफाकखॉ, कवालजीत सिंह उर्फ टिंकल आदि रहे। अतं में सभी कलाकारों को पुरस्कार वितरण एवं सम्मानित किया गया। वही वरिष्ठ उद्घोषक सुरेन्द्र राजेश्वरी को सुन्दर संचालन के क्षेत्र में तथा भोजपुरी लोकगायक लालजी मौर्या को गायन के क्षेत्र में तथा लवली घिल्डियाल को नृत्य के क्षेत्र में मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया।

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