अविपत्तिकर चूर्ण पेप्टिक अल्सर सहित सभी प्रकार के पित्त रोगों में उपयोगी

 अविपत्तिकर चूर्ण पेप्टिक अल्सर सहित सभी प्रकार के पित्त रोगों में उपयोगी

पिथौरागढ़। पीपली, पिथौरागढ़ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ0 अवनीश उपाध्याय पीएचडी (आयुर्वेद) ने कहा कि विभिन्न क्लिनिकल ट्रायल्स में अविपत्तिकर चूर्ण के उपयोग को अल्सर स्कोर, अल्सर हीलिंग, गैस्ट्रिक इरिटेंसी इंडेक्स और पीएच को कम करने में रैनिटिडीन की तरह ही प्रभावी पाया गया है। साथ ही इससे प्रयोग से गैस्ट्रिक टिश्यू के हिस्टोपैथोलॉजिकल मूल्यांकन में भी बेहतर परिणाम मिले हैं। इसके प्रमुख घटक हरीतकी, मरिच और पिप्पली का गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर साइटोप्रोटेक्टिव प्रभाव यानि सतह की रक्षा करने वाला प्रभाव पाया गया है। उन्होंने कहा कि अविपत्तिकर चूर्ण मुख्य रूप से विवन्ध, अपचन, अम्लपित्त और इससे होने वाले पेप्टिक अल्सर और ड्यूओडनल अल्सर में प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि अविपत्तिकर चूर्ण विभिन्न जड़ी बूटियों एव अलग-अलग घटकों के मिश्रण से बनता है, जो अपने चिकित्सकीय प्रभावों से एक प्रभावी औषधि का निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि शुंठी गैस्ट्रिक स्राव को कम करता है, म्यूकोसल प्रतिरोध को बढ़ाता है और गैस्ट्रिक म्यूकोसा के रक्षात्मक कारकों को प्रबल करता है। पाचन क्रिया को सुधारने व खाने को ठीक से अवशोषित करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। काली मिर्च गैस्ट्रिक गतिशीलता को कम कर दस्त के लक्षणों को नियंत्रित करने एवं पाचन क्रिया को सुधारने व खाने को ठीक से अवशोषित करने में सहायक होता है। पिप्पली संक्रमण के कारण होने वाली सूजन को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यों में मदद करते हैं। हरड़ ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित कर डायबिटीज से बचने और पाचन क्रिया को बेहतर करने में मदद करते हैं। यह कब्ज में मल त्याग की क्रिया को उत्तेजित और सुधार करने वाले गुणों से युक्त होता है। बहेड़ा दस्त के लक्षणों को ठीक करने और प्रभावित ऊ तक को संकुचित करके रक्तस्त्राव को कम करने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि आंवले में पाए जाने वाले औषधीय गुण भूख बढ़ाने में मददगार और पाचन में सुधार करते हैं और भोजन के अवशोषण में सहायता व शरीर में गैस्ट्रिक रस के स्राव को बढ़ाने में मदद करने हैं। नागरमोथा सूजन को कम करने, फ्री रेडिकल्स की सक्रियता को कम करने व उनके शरीर के प्रति हानिकरक प्रभाव को रोकने का कार्य करता है। विडंग चोट लगने के बाद सूजन को कम करने में सहायक होता है। तेज पत्ता पेट की गैस या पेट फूलने की समस्या को कम करने व पाचन क्रिया को बेहतर करने में सहायक होता है। लवंग बेसल गैस्ट्रिक म्यूकोसल रक्त प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है और यह म्यूकस स्राव को बढ़ाता है। लौंग सूजन को कम करते हैं और सूक्ष्म जीवों को बढ़ने से रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इलायची में मौजूद इसेंशियल ऑयल गैस्ट्रिक म्यूकोसा को मजबूत करता है। शरीर से विष निकालने और आंतों के विषाक्त प्रभाव को दूर करने में निशोथ सहायक होता है। पाचन बढ़ाने वाला तथा भूख कम होने में उपचार के काम आता है। चीनी ऊ र्जा का उत्कृष्ट स्रोत है। जब शर्करा रक्त में जाती है, तब यह ग्लूकोज में बदल जाती है और यह कोशिकाओं द्वारा अवशोषित होती है, जो ऊ र्जा पैदा करने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करने वाली महिलाओं, बच्चों को यह देने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और सेवन से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। उन्होंने बताया कि अविपत्तिकर चूर्ण की आधा से एक चम्मच की मात्रा सामान्य जल से दिन में दो बार खाने से आधे घंटे पूर्व या बाद में ले सकते हैं और कब्ज को दूर करने के लिए एक चम्मच पाउडर रात को सोते समय गुनगुने पानी से भी लिया जा सकता है।

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