आधुनिक भारत के शिल्पीकार थे सरदार पटेल : अनिल आर्य

 आधुनिक भारत के शिल्पीकार थे सरदार पटेल : अनिल आर्य

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 147 वीं जयन्ती पर आर्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि सरदार पटेल का जन्म गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। भारत को संगठित बनाने में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है। सरदार पटेल को भारत की 565 रियासतों का विलय करके अखण्ड भारत के निर्माण के लिए याद किया जाता है। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सरदार पटेल आधुनिक भारत के शिल्पिकार थे, वह स्पष्ट एवं निर्भीक वक्ता रहे। उनकी निर्णायक क्षमता अद्भुत थी। स्वतन्त्रता के बाद उन्हें भारत का उप-प्रधानमन्त्री तथा गृहमन्त्री बनाया गया। गृहमन्त्री होने के कारण रजवाड़ों के भारत में विलय का विषय उनके पास था। सभी रियासतें स्वेच्छा से भारत में विलीन हो गयीं थी, पर जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद ने टेढ़ा रुख दिखाया। सरदार की प्रेरणा से जूनागढ़ में जन विद्रोह हुआ और वह भारत में मिल गयी। हैदराबाद में आर्य समाज का आन्दोलन व फिर पुलिस कार्यवाही कर उसे भारत में मिला लिया गया। यदि सरदार पटेल न होते तो हिन्दुस्तान का वर्तमान रूप ऐसा न होता, हिन्दुस्तान खण्ड में विभाजित होता। रजवाड़ों रियासतों का हिन्दुस्तान में विलय करने का श्रेय सरदार पटेल को ही जाता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम आजादी का मतलब समझें और राष्ट्र की एकता अखण्डता की रक्षा का संकल्प लें। देश की वर्तमान विषम परिस्थितियों में सरदार पटेल बहुत याद आते हैं आज पुन: उनकी नीतियों पर चलने की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि फरीदाबाद से डॉ. गजराज सिंह आर्य ने कहा कि सरदार पटेल गंभीर चिन्तक, बहुआयामी, आदर्शवादी व व्यवहारिक व्यक्तित्व के धनी थे। राष्ट्र के प्रति उनका प्रेम अद्वितीय था। वर्ष 1928 में गुजरात में बारडोली सत्याग्रह हुआ जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया। उस समय प्रान्तीय सरकार किसानों से भारी लगान वसूल रही थी। सरकार ने लगान में 30 फीसदी वृद्धि कर दी थी। जिसके चलते किसान बेहद परेशान थे। वल्लभ भाई पटेल ने सरकार की मनमानी का कड़ा विरोध किया। बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि दी। अगर आजादी के बाद नेहरू की जगह प्रधानमंत्री सरदार पटेल बनते तो आज कश्मीर व अलगावाद की समस्या नहीं होती। कार्यक्रम अध्यक्ष गाजियाबाद से प्रवीन आर्य ने कहा कि सरदार पटेल के विचार से व्यक्ति की अधिक अच्छाई उसके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिए और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिए। निडर होकर अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने में सर्वदा आगे रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने पटेल की जगह नेहरू को प्रधान मंत्री बनवा कर अनर्थ किया। राष्ट्रीय महामंत्री महेन्द्र भाई ने कहा कि भारत के राजनीतिक एकीकरण में लौहपुरूष, भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस अवसर पर गायिका पिंकी आर्या, रजनी चुग, सुनीता अरोड़ा, रजनी गर्ग, ईश्वर देवी, कमला हंस, जनक अरोड़ा, विमला आहूजा, मधु खेड़ा, प्रवीण आर्या, रविन्द्र गुप्ता, बिंदु मदान, कृष्णा गांधी, उषा सूद आदि ने गीतों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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